राजस्थान में ऊंट राज्य पशु

राजस्थान सरकार ने रेगिस्तान के जहाज कहे जाने वाले ऊंट को शुक्रवार को राज्य पशु घोषित कर दिया। राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार चिंकारा के साथ-साथ अब ऊंट भी राज्य पशु बन गया है। ऊँट को रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है ।

2014 को ऊँट को राजस्थान के राज्य पशु का दर्जा दिया था। जिसकी घोषणा 19 सितम्बर 2014 को बीकानेर में की गई। 

ऊंट, जिसे रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है, को 19 सितंबर 2014 को एक राज्य पशु घोषित किया गया 

ऊंट का वैज्ञानिक नाम केमेलस ड्रोमेडेरियस (कैमलस डोमेडेरियस) है। इसे रेगिस्तानी जहाज़ भी कहा जाता है

बीकानेर को राज्य का एकमात्र पशु ऊँट प्रजनन क्षेत्र होने का गौरव प्राप्त है। बीकानेर महाराजा राव बीकाजी के समय से ही ऊँट इस क्षेत्र में आजीविका का साधन रहा है। बीकानेर रियासत की स्थापना के बाद से ही बीकानेर इस जानवर का घर रहा है।

आज विश्व ऊंट दिवस (World Camel Day) है। यह प्रतिवर्ष 22 जून को मनाया जाता है। माना जाता है कि सन् 2009 में पहला ऊंट दिवस पाकिस्तान में मनाया गया था।

ऊंट को दृढ़ता और संघर्ष का प्रतीक माना गया है.

राजस्थान में सर्वाधिक ऊँट जैसलमेर में तथा सबसे कम ऊँट प्रतापगढ़ जिले में पाये जाते हैं। केन्द्रीय ऊँट प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान जोहारबीड, बीकानेर में स्थित है।

ऊँट के नाक में डाले जाने वाला लकड़ी का बना आभूषण गिरबाण कहलाता है। 

पाबूजी भारत में राजस्थान के एक लोक-देवता हैं। वह 14वीं शताब्दी में राजस्थान में रहे। इन्हें राजस्थान में ऊंटों के देवता के रूप में जाना जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here